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Kullu Dussehra Live Images | कुल्लू का दशहरा उत्सव 2018

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कुल्लू घाटी का दशहरा | Kullu ka Dussehra | Dusshera Celebration in Kullu



आइए इस लेख में जानते हैं कुल्लू के बेहद प्रसिद्ध कुल्लू घाटी के दशहरा के बारे में। कुल्लू की घाटियां अपने अप्रतिम सौंदर्य के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। अवसर किसी त्यौहार या मेले का हो तो देवताओं और गंधर्व की पुण्य भूमि माने जाने वाले समूचे हिमाचल प्रदेश की शोभा ही निराली हो जाति है। धर्म निष्ठा, संस्कृति, गौरव, प्राकृतिक सौंदर्य और निश्चय सरदा से परिपूर्ण होने के कारण ही कुल्लू का दशहरा मेला भारत का सबसे प्रसिद्ध दशहरा मेला माना जाता है। कुल्लू की वादियों में सैकड़ों मंदिर और हजारों गांव दशहरा के अवसर पर ऐसे सजते हैं मानो ऐसा लगता है की देवताओं की यह घाटी सच में देव उत्सव मना रही हो। दशहरा के पर्व पर घाटी के सभी मूर्तियां और बड़ी-बड़ी देवी देवताओं की कलाकृतियां कुल्लू के ढालपुर मैदान में लाई जाती है। यहां भगवान श्री राम जी की प्रतिरूप रघुनाथ जी की उपस्थिति में सप्ताह भर पूजा और आराधना की जाती है। इसके साथ साथ लोकगीत, लोक नृत्य और कई तरह के कार्यक्रम किए जाते हैं। रघुनाथ जी को सुल्तानपुर में मंदिर से 28 पहियों वाले रथ पर सजा कर ढालपुर मैदान के शिविर में लाया जाता है जहां उनका देव दरबार लगता है। अंचल के निवासी अपने अपने ग्राम देवताओं को लेकर रथ के पीछे पीछे चलते हैं, सप्ताह भर के इस मेले में कुल्लू घाटी का समूचा सौंदर्य उमर उठता है। कुल्लू में दशहरे पर रामायण नहीं दोहराया जाता है, समारोह के अंतिम दिन लंका दहन मनाया जाता है, रघुनाथ जी को उनके मंदिर पहुंचा कर मेले का समाप्ति होता है।
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हमें उम्मीद है कि आपको कुल्लू का दशहरा देखने का अवसर जरुर मिला होगा, और अगर नहीं मिला है तो आप इस साल कुल्लू दशहरा मेला जरूर देखें और इस पुरानी संस्कृति का लुफ्त उठाएं।

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