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गणेश पूजन विधि, शुभ मुहूर्त 2018 {Ganesh Pujan Vidhi*} गणपति पूजा

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अगर आप इस गणेश चतुर्थी भगवान गणेश बप्पा को अपने घर बुलाना चाहते हैं और उनकी आराधना करना चाहते हैं तो फिर हम आपको बताने जा रहे हैं कैसे आप अपने घर में गणपति गजानंद की स्थापना कर सकते हैं।आप चाहे बप्पा को अपने घर गणेश पूजा विधि विधान के साथ लाना चाहते हैं तो यह जानकारी आपके लिए है। आप गणेश पूजन विधि 1 दिन के लिए, 5 दिन के लिए, 7 दिन के लिए या 11 दिन के लिए कर रहे हो, हम आपके लिए सारे विधि-विधान अच्छे से समझेंगे और भगवान गणपति की विधि पूर्वक पूजन करने के तरीके बताएंगे।

Ganesh puja vidhi in hindi

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गणेश पूजा करने से ऐसी कोई भी परेशानी या कोई भी समस्या नहीं है जिसका समाधान ना हो जाए। सबसे बड़ी बात है जो विद्यार्थी हैं और पढ़ाई में कमजोर हैं बहुत पढ़ते हैं लेकिन उनको याद नहीं होता या शरारत ज्यादा करते हैं, पढ़ाई मे उनका मन नहीं लगता ऐसे विद्यार्थियों के लिए तो भगवान गणपति विशेष रूप से वरदान देते हैं। जो धन के इच्छुक हैं और जिनके सामने कोर्ट कचहरी के मुकदमे हो सब की मुसीबत हल हो जाती है। तथा जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा हो अगर वह कन्याएं भगवान गणपति का पूजन करें तो निश्चित रुप से मनचाहे पति की प्राप्ति होगी।

Ganesh puja muhurat

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही गणपति का जन्म हुआ इसलिए हम सभी गणेश चतुर्थी इसी दिन मनाते हैं।

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: दिनांक 12 सितंबर दिन बुधवार को शाम 4:07 से चतुर्थी तिथि समाप्त: दिनांक 13 सितंबर दिन गुरूवार को दोपहर 2:51 बजे तक

गणेश पूजन के लिए मुहूर्त: दिनांक 13 सितंबर दिन गुरूवार को सुबह 11:02 से 13:31तक

गणेश जी की मूर्ति लाने का मुहूर्त:

  1. दिनांक 12 सितम्बर दिन बुधवार को मध्याह्न 3:30 से सांयकाल 6:30 तक
  2. दिनांक 13 सितम्बर दिन गुरुवार प्रातः 6:15- 8:05 तक तथा 10:50-11:30 तक

गणपति को जिस समय आप लाए उस समय लाल या पीले वस्त्र में ढक करके लाएं। लाल वस्त्र में ढककर गणपति जी की मूर्ति ला करके अपने घर के उचित पूजा स्थान पर विराजित कर दें लेकिन वह वस्त्र जिससे गणपति जी को ढक कर के रखा है उसको हटाना नहीं है। जब गणपति बप्पा की पूजा आराधना होगी तभी गणपति की स्थापना करेंगे जिसमें वह पूजा स्थापना पूजा करेंगे उसी समय उस कपड़े को हटाना है।

क्या-क्या तैयारियां करें? बप्पा को अपने घर में विधि पूर्वक स्थापित करेंगे सबसे पहले आप एक लकड़ी की चौकी को अपने घर में ले लीजिए क्योंकि इसी लकड़ी की चौकी के ऊपर ही बप्पा की स्थापना करना उचित रहता है। लकड़ी की चौकी है और इस लकड़ी की चौकी के ऊपर बिछाने के लिए लाल रंग का कपड़ा ले लीजिए। इस लाल रंग के कपड़े को चौकी के ऊपर विचार करके और इसके ऊपर हरे रंग की मुंग बिछा करके फिर सारी सामग्रियां रखें।
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पान का पत्ता है, पान के पत्ते के ऊपर सुपारी भी रख देनी है, लॉन्ग रखना है, इलायची रख दे, इसके ऊपर कुछ दक्षिणा भी रख दें और हल्दी की गांठ भी रखनी है। सारी 5 चीजों को रख कर के और इसी के ऊपर बप्पा की स्थापना की जानी है और यह सारी सामग्री जो मैंने आपको गणेश पूजा सामग्री बताया है इसके अलावा कलावा रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही मिट्टी का कलश और इस मिट्टी के कलश को लाल कपड़े से अथवा लाल धागे से बांध करके रखना है अथवा खुला नहीं रखना है।
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सबसे महत्वपूर्ण कलश की पूजा में होता है वह नारियल है और इस नारियल को भी लाल कपड़े से लपेट फिर कलश के ऊपर स्थापना किए जाते हैं। कलश के साथ आम के पत्ते भी रखना है जो कि तोरण कहलाते हैं यह अत्यंत शुभ माने जाते हैं। घर में किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए यह आम के पत्ते अत्यंत चमत्कारी होते हैं। आम के पत्ते से पंच पल्लव की स्थापना की जाती है। इसके साथ अक्षत है, अक्षत की व्यवस्था आपको करनी है और इसके साथ ही यह बात की विशेष ध्यान रखें कि बप्पा की पूजा में लाल रंग के पुष्पों का विशेष महत्व है तो इसलिए लाल रंग के फूलों की व्यवस्था अवश्य करनी है। और इसके साथ ही सुपारी, इलायची, लौंग की भी व्यवस्था करके रखनी चाहिए, यह सारी सामग्री पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आपको जनेऊ धारण करना है इसको हम यज्ञोपवीत भी कहते हैं जो व्यक्ति पूजन करते हैं उनको स्वयं भी जनेऊ धारण करना चाहिए और बप्पा को भी जनेऊ धारण कराना चाहिए। सबसे बड़ी बात होती है सिंदूर की जैसे हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते हैं ठीक वैसे ही गणेश भगवान को भी सिंदूर चढ़ाया जाता है। अबीर गुलाल भी बप्पा को अत्यंत प्रिय है और यह भी खुशी के साथ में भक्त लोग भगवान बप्पा को चढ़ाते हैं। वह चीज जो गणपति जी को अत्यंत प्रिय है वह है यह मोदक जो भी भक्त लोग भगवान गणपति की स्थापना अपने घर में करते हैं उनको यह मालूम होना चाहिए कि मोदक और दूसरे मिष्ठान जरूर रखने हैं। गणपति जी के 3 विशेष रूप से प्रसाद होते हैं उसमें एक मोदक होता है, एक नारियल होता है और एक गुर के पकवान होते हैं। गणपति को 21 मोदक चढ़ाना चाहिए और 21 मोदक चढ़ाने के बाद उसमें 5 निकालकर के गणपति के पास रख देना चाहिए और शेष बचे हुए जो मोदक है वह गणपति के भक्तों में वितरण कर देना चाहिए।

ganesh pujan vidhi

शुद्ध घी की ज्योति जला करके तथा अगरबत्ती भी जला लें और अनेक प्रकार के जो फल हैं यह बप्पा को अर्पण करके और बप्पा का आशीर्वाद लेना चाहिए।
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गणेश चतुर्थी पूजा में सावधानी बरतें:-
  • सबसे बड़ी बात यह है कि गणेश चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए, आकाश की तरफ नहीं देखना है। यह बात आपको ध्यान रखना है चंद्रमा को अर्घ भी देना है लेकिन आपको चंद्रमा को अर्घ देना हाथ ऊपर करके और सिर नीचे करके देना है जिससे आपकी आंखें पृथ्वी की तरफ होना चाहिए। सिर झुका हुआ होना चाहिए लेकिन आंखें नीचे जमीन की तरफ करके और हाथ ऊपर उठाकर के चंद्रमा को अर्घ देना है।
  • आपको तीन मूर्ति गणेश की अपने घर में भूलकर भी नहीं रखनी है।
  • तुलसी की माला या तुलसी के पत्ते गणेश भगवान को अर्पण नहीं करें, तुलसी की जगह भगवान गणपति को दूर्वा जो घास होती है उसको इस्तेमाल कर सकते हैं। जीन कन्याओं का विवाह नहीं हुआ वह दूर्वा की माला बनाकर भेंट करें निश्चित रूप से मनचाहे पति की प्राप्ति अवश्य होगी।
नियम के अनुसार गणपति की चार प्रहर आरती होती है चार प्रहर का मतलब होता है 12 घंटे का दिन है 12 घंटे को आप चार भागों में बांट दीजिए तो मतलब 3-3 घंटे पर पूजा करना है। सूर्योदय के समय, उसके बाद 3 घंटे बाद, उसके बाद पूरा 3 घंटे बाद उसके बाद सायंकाल को यह चार पहर की आरती गणपति की होती है। तो चार प्रहर की आरती सभी दर्शकों को अपने घर में करनी है। गणपति जी की स्थापना आप 1 दिन की करें, 3 दिन की करें, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन की करें नियम सभी के लिए एक ही होते हैं।
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