Header Ads

{{Best निबंध*}} Essay on Durga Puja in Hindi,Bengali New 2018

ads xml parser
Hindi Essay On Durga Puja #Nibandh #लेख #दुर्गा पूजा पर लेख हिन्दी में

Essay on durga puja in hindi

भारत त्योहारों का देश है ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां के लोग भिन्न-भिन्न धर्मों को मानते हैं। और हर साल अपने-अपने त्योहार और उत्सव को मनाते हैं। दुर्गा पूजा भी इन्हीं त्योहारों में से एक है। यह देश भर में हिंदुओं द्वारा अत्यंत हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार वर्ष में दो बार आता है एक चैत्र मास में और एक अश्विन में। दो-तीन महीने पहले से ही मूर्तिकार मूर्तियां बनाने में व्यस्त हो जाते हैं। बाजार में दुकानें सजने लगती हैं और कपड़े तथा अन्य चीजें खरीदने तथा बेचने वालों की भीड़ लग जाती है। दुर्गा पूजा विद्यार्थियों के लिए भी खुशी का अवसर होता है क्योंकि छुट्टियों के कारण उन्हें अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा आराम मिलता है और लोग इसके भरपूर मजे लेते हैं। दुर्गा पूजा 10 दिनों तक मनाई जाती है, पहले दिन मंत्रोच्चारण के साथ कलश की स्थापना होती है। जगह-जगह पर पंडाल लगने लगते हैं और सातवें दिन मां दुर्गा, सरस्वती, गणेश, कार्तिके कथा महिषासुर नामक राक्षस की प्रतिमाओं की स्थापना होती है। पंडाल के आस-पास तो जैसे मेला ही लग जाता है। कहीं-कहीं रामलीला भी होती है। दसवें दिन रावण वध होता है जिसमें रावण के पुतले को जलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि राम जी ने रावण का वध कर युद्ध में विजय प्राप्त की थी और देवी दुर्गा की पूजा की थी। तभी से यह त्योहार मनाया जाने लगा यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

Hope you all liked our durga puja par essay, there are more durga puja hindi and essay on our site.
durga puja essay in hindi
essay on durga puja in hindi
Also read our Quality post on:-  Essay on dussehra in hindi

Durga puja essay in hindi

ESSAY ON DURGA POOJA IN HINDI FOR SCHOOL KIDS
भारत त्योहारों की भूमि है विभिन्न तरह के लोग भारत में रहते हैं और वह पूरे वर्ष अपने-अपने त्यौहार मनाते हैं। दुर्गा पूजा पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि दुर्गा पूजा तब शुरू हुई जब भगवान राम ने रावण को मारने की शक्ति पाने के लिए देवी दुर्गा की पूजा की थी। देवी दुर्गा की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि उन्होंने 10 दिनों की लड़ाई के बाद राक्षस महिषासुर को मार डाला था और लोगों को असुरों से राहत मिली थी। भक्त मां दुर्गा की पूजा पूरी भक्ति के साथ करते हैं। 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। भक्त इन सभी 9 दिन या पहले और आखिरी दिन उपवास रखते हैं। लड़कियों को देवी दुर्गा को खुश करने के लिए साफ-सुथरे तरीके से पूजा करनी होती है। कुछ लोग घर पर इस त्यौहार पर सभी व्यवस्थाओं के साथ पूजा करते हैं और वह पवित्र नदी गंगा में मूर्ति विसर्जन के लिए भी जाते हैं। दुर्गा पूजा पूरी खुशी और उत्साह के साथ देवी दुर्गा के भक्तों के द्वारा मनाया जाता है।

Durga puja essay in sanskrit
Here we are providing you durga puja essay in sanskrit, hope these essay will be useful for you all.

Paragraph on durga puja in hindi
दुर्गा पूजा खुशियों का त्योहार है और यह भारत में बहुत ही खुशी और उल्लास के साथ मनाया जाता है। वैसे तो भारत में साल भर बहुत सारे त्यौहार मनाए जाते हैं, लेकिन दुर्गापूजा उनमें से सबसे अलग है क्योंकि यह 10 दिनों का त्यौहार है और इसमें मां दुर्गा की आराधना की जाती है जो कि सर्व शक्ति का रूप है। मां दुर्गा बहुत ही शक्तिशाली देवी है जिन्होंने राक्षसों का अंत करके पृथ्वी वासियों को बुराई पर अच्छाई की जीत का महत्व बतलाया। दशहरा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि और दिवाली यह सारे पर्व लगभग हर साल एक साथ मनाए जाते हैं। क्योंकि इन सभी वर्गों में एक खास बात है, जो हमें यह सिखाती है कि हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। भारतीय महिलाएं मां दुर्गा की पूजा करती हैं और अपने घर के लिए सुख समृद्धि की मनोकामना करते हैं। वैसे तो दुर्गापूजा पूरे देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन कोलकाता की दुर्गा पूजा पूरे देश भर में बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। दुर्गा पूजा के वक्त कोलकाता में लोग मां दुर्गा को सर्वप्रथम मां की तरह पूजते हैं और उनका सम्मान करते हैं। कोलकाता की धूमधाम और सजावट को देखकर कोई भी आश्चर्यचकित हो सकता है।

Article on durga puja in bengali language

बंगाल का प्रसिद्ध दुर्गा पूजा | Special Durga Puja in Kolkata in Hindi
essay on durga puja festival in bengali language
essay on durga puja festival in bengali language

Durga puja essay in bengali

बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव की धूम अभी से ही देखी जा सकती है। दुर्गोत्सव आते ही वैसे तो पूरे देश में चहल-पहल और प्रसन्नता का वातावरण होता है परंतु बंगाल राज्य में यह उत्सव एक अलग ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। महाकाली की नगरी कोलकाता में दुर्गा पूजा का उत्साह थमने का नाम ही नहीं लेता, बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियां बहुत पहले से ही आरंभ हो जाती हैं, परंतु दुर्गोत्सव की शुरुआत पंचमी से होती है। उत्सव से पहले देवी दुर्गा की मनमोहक मूर्तियां बनाई जाती है। कोलकाता के कुमोरटुली नामक जगह पर मूर्तिकार देवी दुर्गा को मनोहर आकार देते हैं। बंगाल में दुर्गा के साथ गणपति, लक्ष्मी, सरस्वती और कार्तिकेय की मूर्तियां भी बनाई जाती हैं। अचंभित करने वाली बात है कि यहां निर्मित मूर्तियां विदेशों में भी भेजी जाती हैं। देशभर में बंगाल की दुर्गा पूजा प्रसिद्ध है तथा लोगों के मन में यह प्रश्न भी आता है कि बंगाल में क्यों इतनी धूमधाम से यह पर्व मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि बंगाल के लोगों की मान्यता है कि जिस प्रकार लड़की विवाह के पश्चात अपने मायके आती है उसी प्रकार देवी दुर्गा इन 9 दिनों के लिए अपने मायके आती हैं। यही कारण है कि उन्हें प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि बंगाल में नवरात्रि का इतना महत्व है। नवरात्रि देवी दुर्गा तथा राक्षस महिषासुर के मध्य हुए युद्ध का प्रतीक है।

यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है इसी कारण देशभर में लोग इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। अब हम जानेंगे बंगाल की दुर्गा पूजा के कुछ रोचक तथ्यों के विषय में। दुर्गा पूजा के अवसर पर कोलकाता नगरी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इस समय में यह सही मायने में आनंद का शहर बन जाता है। इस शहर में दुर्गा पूजा के दौरान हर गली पंडालों से सजती है। लोग पंडाल देखने तथा प्रतिमा दर्शन करने के लिए रात भर लाइन में लगते हैं। चकाचौंध कर देने वाली पंडालों की चमक को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां पंडालों की प्रतियोगिताएं भी होती हैं और जो पांडाल सबसे अधिक आकर्षक होता है, उसे पुरस्कृत किया जाता है।
कोलकाता के कुछ विशेष तथा प्रसिद्ध पंडालों के नाम है-
  1. बेहाला
  2. उतरी कोलकाता
  3. चेतला
  4. साउथ कोलकाता
  5. मोहम्मद अली पार्क
  6. बाग बाजार आदि।
You Should Definitely Watch All Over INDIA Newly Made :- durga puja pandal 2018
अब जानेंगे बंगाल में दुर्गा पूजा के समय होने वाली कुछ सुंदर रस्मो के बारे में। चोखूदान की रसम- कोलकाता में दुर्गा पूजा के प्रथम दिन दुर्गा को रंग चढ़ता है और यह रसम नवमी तक चलती है। नवरात्रि आरंभ होने से 1 सप्ताह पहले ही दुर्गा देवी की प्रतिमाएं तैयार हो जाती हैं लेकिन उनके नेत्र बनाने से छोड़ दिए जाते हैं। महालया के दिन नेत्र बनाए जाते हैं, इसे चोखूदान कहते हैं जिसका अर्थ है नेत्रदान, मान्यता है कि इसी दिन देवी धरती पर आती हैं। कुलाबो की रसम, सातवें दिन सुबह के समय एक छोटे केले के पेड़ की पूजा होती है इसमें दुर्गा मां की प्रतिमा के सामने केले के पेड़ को साड़ी पहना कर खड़ा किया जाता है।
कुमारी कन्या पूजा- बंगाल में एक विशेष पूजा है जो हर गली तथा घरों में की जाती है। इस दिन कुंवारी कन्याओं की पूजा की जाती है। नवरात्रि के 9 दिन कुंवारी कन्या को दुर्गा के सामान पूजा जाता है। इसका प्रचलन स्वामी विवेकानंद द्वारा बेलूर मठ में किया गया था।
दुर्गा अष्टमी पुष्पाञ्जलि- अष्टमी का दिन पूरे देश में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती कुर्ता पहनते हैं। देवी को पुष्प अर्पित किए जाते हैं, आरती होती है और दुर्गा के मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
ढोलकी ध्वनि (Dholki Tandav)- इसमें 9 दिन तक पंडालों के बाहर ढोल बजाए जाते हैं और पांडवों को फूलों से सजाया जाता है।
सिंदूर खेला- विजयदशमी के दिन मां को विदा दी जाती है, सभी हर्षोल्लास के साथ विदाई देते हैं। विवाहित महिलाएं माथे पर सिंदूर लगाकर पंडालों में आती हैं और देवी दुर्गा को उल्लू ध्वनि के साथ विदा देती हैं, फिर महिलाएं एक दूसरे को गुलाल लगाती हैं और सिंदूर खेलती हैं। लोग बड़ों से आशीर्वाद लेकर नम आंखों के साथ मां के अगले वर्ष आने की कामना करते हैं और इस प्रकार दुर्गा पूजा का समापन होता है।

Durga puja paragraph in bengali language

দুর্গাপূজা সারা দেশে প্রচুর সুখের সাথে উদযাপিত হয়। দুর্গা পূজা ভারত ও ভারতের বাইরে সকল হিন্দুদের জন্য একটি অপরিহার্য উত্সব। আমরা সারা ভারতে দুর্গা পূজা উদযাপন করি, কিন্তু এটি প্রধানত কলকাতার বিখ্যাত শহর, বাংলায় পালিত হয়। এই উৎসবে ছোট বয়স্ক মানুষ, শিশু ও নারী সব ধরণের উৎসবে জড়িত। লোকজন এবং দুর্গা পূজার উৎসবকে অত্যন্ত গুরুত্ব সহকারে গ্রহণ করুন।

আমাদের সবাইকে দুর্গাপূজা থেকে ভাল শুভেচ্ছা ও সম্পদ কামনা করা উচিত। দুর্গা পূজা ভারতের বৃহত্তম উত্সব এক; এটা তাদের বাড়িতে এবং উপনিবেশ মধ্যে মহান পরিতোষ সঙ্গে ভারতীয় মানুষ দ্বারা উদযাপন করা হয়। দুর্গা পূজা আসার পর আমরা সবাই খুব উত্তেজিত হয়ে পড়ি কারণ এটি বছরে একবার আসে। দুর্গাপূজা উপলক্ষে দুর্গাপূজা উপলক্ষ্যে আমাদের সকলকে অবশ্যই দুর্গাপূজার গুরুত্ব সম্পর্কে সচেতন হতে হবে।
বাংলার মানুষ এটিকে খুব বড় উৎসব বলে মনে করে কারণ সেই সময়ে মায়ের দুর্গা মন্দিরের উত্তাপের বিজয়কে তুলে ধরেছিল। আমাদের সব আমাদের পূর্বপুরুষ এবং সংস্কৃতির উপর গর্ব করা উচিত, তাদের কারণ, আমরা আমাদের পাওয়া আত্মা দিয়ে এত কমনীয় এবং খুশি। দুর্গা পূজা একটি 10 ​​দিনের উৎসব যেখানে মানুষ একে অপরের প্রতি সুখ ভাগ করে নেয় এবং মাতা দুর্গা পূজা করে। আমরা আপনাকে মানুষকে অনুরোধ করি যে আপনি মা দুর্গা থেকে সুখ ও সমৃদ্ধির জন্য ইচ্ছুক, এবং আপনার জীবনকে সুখী করতে চান। এই উত্সবের ঋতুতে দুর্গা পূজা দেখার জন্য শিশুদের ও বৃদ্ধ ব্যক্তিরা বাইরে যায়। সারা দেশ জুড়ে দুর্গা পূজা উপলক্ষে নারীরা ও পুরুষও বিভিন্ন ধরনের পণ্ডিতদের তৈরি করা হয়, যা দেখতে অদ্ভুত হবে।

Durga Pooja is celebrated with great fanfare throughout the country. Durga Puja is a significant festival. The most significant Durga Puja is observed in the famous city of Kolkata, west bengal. In this festival, small elderly children and women join together and take advantage of the celebration of Durga Puja festival. We all should wish for good wishes and wealth from Mother Durga. We have tried to provide some of the best essay on durga puja in hindi in this post, still you can browse more of our essay on maa durga in hindi and english from the link provided above near first paragraph.
Powered by Blogger.