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धनतेरस पावन कथा: Read Dhanteras Story for good Health,Wealth

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Dhanteras Katha

धनतेरस की कथा || धनतेरस कथा || Dhanteras Katha Ka Mahatv || Dhanteras Special 2018

एक बार भगवान विष्णु जी मृत्यु लोक का भ्रमण करने के बारे में विचार कर रहे थे, तो माता लक्ष्मी ने उनसे कहा कि वह भी उनके साथ चलना चाहती है। इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि अगर तुम मेरी हर बात को मानो तो मैं तुम्हें अपने साथ लेकर चलूंगा। माता लक्ष्मी ने उनकी इस शर्त को स्वीकार कर लिया और दोनों भूमंडल पर आ गए। कुछ देर के बाद भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से कहा कि जब तक मैं ना आऊं तब तक तुम यहीं ठहरो मैं दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा हूं। तुम उस तरफ देखना भी मत, तब विष्णु जी के जाने के बाद लक्ष्मी जी के मन में अजीब सा महसूस हुआ कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या है जो मुझे वहां देखने के लिए भी मना कर दिया गया है।

इसको जानने के लिए माता लक्ष्मी जी भी जब भगवान के पीछे पीछे चल पड़ी तब रास्ते में उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया। उस में लगे फूलों से मुक्त होकर लक्ष्मी जी ने कुछ फूलों को तोड़ा और अपना सिंगार कर लिया। आगे उन्हें गन्ने के खेत दिखाई दिए और लक्ष्मी जी ने चार गन्ने तोड़े और उन्हें चूसने लगी। इसी बीच विष्णु जी वहां आ गए और उन्हें वहां देख कर गुस्सा हो गए और उन्हें श्राप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आने के लिए मना किया था, पर तुम ना मानी और किसान की चोरी का अपराध कर बैठी। अब तुम 12 साल तक इस किसान के पास सजा के रूप में सेवा करोगी ऐसा कहकर विष्णु जी छीर सागर लौट आए।
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Dhanteras vrat katha in hindi

लक्ष्मी जी किसान के घर में रहने लगी, वह किसान बहुत ही गरीब था लक्ष्मी जी ने उसकी पत्नी को कहा कि तुम स्नान करके देवी लक्ष्मी जी की पूजा करो, फिर रसोई बनाना तुम जो मांगोगी वह तुम्हें अवश्य मिलेगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया और पूजा के प्रभाव से और लक्ष्मी जी की कृपा से किसान का घर धीरे-धीरे अन, धन, रत्न और आभूषण से उभरने लगा। इस तरह लक्ष्मी जी ने किसान को धन धान्य से परिपूर्ण कर दिया और लक्ष्मी जी के 12 साल बाद आनंद के संकट कट गए और वह छीर सागर जाने के लिए तैयार हो गई। जब विष्णु जी लक्ष्मी जी को लेने के लिए आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इनकार कर दिया और लक्ष्मी जी भी बिना किसान की मर्जी के वहां से नहीं जाना चाहती थी। इस पर विष्णु जी ने एक चतुराई का सहारा लिया, विष्णु जी जिस दिन लक्ष्मी जी को लेने आए थे उस दिन वारुणी पर्व था तो विष्णु जी ने किसान को वारुणी पर्व का महत्व समझाते हुए कहा कि तुम परिवार के सहित जाकर गंगा में स्नान करो और इन कौड़ियों को को भी वही छोड़ देना जब तक तुम नहीं आओगे तब तक मैं लक्ष्मी को लेकर नहीं जाऊंगा। लक्ष्मी जी ने किसान को चार कौड़ियों दी ताकि किसानों उन्हें गंगा में बहा दे।
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किसान ने भी वैसा ही किया जैसे ही उसने गंगा में चार कौड़ियां डाली नदी में से चार हाथ निकली और कौड़ियां को लेकर चले गए, तब किसान को इस बात का आभास हुआ कि उनके घर में जो स्त्री है वह कोई देवी है। किसान ने गंगा माता से पूछा कि हे माता यह चार भुजाएं किसकी है तब गंगा जी ने कहा कि हे किसान यह चारों भुजाएं मेरी ही है, तूने जो कौड़ियां डाली है वह तुझे किसने भेंट की थी। इस पर किसान ने कहा कि मेरे घर एक स्त्री आई हुई है, उन्होंने ही मुझे यह कौड़ियां दी थी। इस पर गंगा जी ने कहा कि तुम्हारे घर में जो स्त्री आई हुई है वह स्वयं देवी लक्ष्मी जी है और वह पुरुष भगवान विष्णु जी है, तुम लक्ष्मी को जाने मत देना वरना तुम फिर से निर्धन हो जाओगे। इस बात को सुनकर किसान वापस अपने घर आ गया और वहां जाकर माता लक्ष्मी जी का आंचल पकड़ लिया और कहने लगा कि मैं आपको कहीं जाने नहीं दूंगा। इस पर भगवान विष्णु जी ने कहा कि इन्हें कौन जाने देना चाहता है किंतु यह चंचलता है, कहीं ठहरती ही नहीं। बड़े से बड़े व्यक्ति इन्हें नहीं रोक पाए, इनको तो मैंने श्राप दे रखा था कि यह 12 वर्ष तक तुम्हारी सेवा करें अब उनके 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं, तो तुम्हारी सेवा का समय पूरा हो चुका है।

किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं मैं अब इन्हें कहीं नहीं जाने दूंगा तुम कोई दूसरी स्त्री यहां से ले जाओ तो इस पर माता लक्ष्मी जी बोली की हे किसान अगर तुम मुझे रोकना चाहते हो तो तुम वैसा ही करो जैसा मैं कहती हूं। उन्होंने कहा कि कल तेरस है तो तुम अपने घर को लिप पोत के स्वच्छ रखना, रात्रि में घी के दीपक जलाना और शाम को मेरी पूजा करना साथ ही तुम तांबे के कलश में ₹1 भरकर रखना मैं उस क्लास में निवास करने लगूंगी। किंतु ध्यान रखना कि पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी इस तरह मैं तुम्हारे घर में वर्ष भर के लिए रहूंगी और अगर तुम चाहते हो कि मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूं तो तुम प्रतिवर्ष इसी तरह से पूजा करना। इतना कहकर माता लक्ष्मी दीपकों के प्रकाश की तरह दसों दिशाओं में फैल गई और भगवान विष्णु देखते रह गए। अगले दिन किसान ने माता के बताए अनुसार उनकी पूजा की और उसका घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहा। इस तरह से हर वर्ष धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी जी की पूजा का परिचालन शुरू हुआ है। दोस्तों यदि आपको जानकारी पसंद आई हो तो कृपया हमारे पोस्ट को शेयर करें ताकि और लोगों तक यह जानकारी पहुंचे।

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