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Dhanteras 2018 पूजा विधि, शुभ मुहूर्त | धनतेरस सरल धन प्राप्ति मंत्र विधि

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Dhanteras Puja Vidhi - How to do Dhanteras Puja on Diwali Festival for Good Health, Wealth
सबसे पहले शाम को संध्या समय दीपक जलाएं इसके लिए पूजा स्थान पर एक पट्टा रख लीजिए और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाइए। अब इसके ऊपर एक दीपक रखिए और इस दीपक को जला लीजिए। अब आप एक छेद वाली कौड़ी ले लीजिए और इस कौड़ी को आप दीपक में रख दीजिए। अब इस दीपक के चारों ओर गंगाजल पानी से 3 बार छींट दीजिए। अब दीपक को रोली से तिलक लगाएं और चावल भी अर्पण करें। अब आप इसमें थोड़ी सी चीनी यानी शक्कर चढ़ा दीजिए, इसके बाद इसमें ₹1 का सिक्का रख दीजिए। अब कुछ फूल लेकर दीपक को अर्पण करें इसके बाद हाथ जोड़कर दीपक को प्रणाम करें इसके बाद परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं। अब इस दीपक को उठाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दाहिनी ओर रख दीजिए। यमदीपदान के बाद धन्वंतरि पूजा करें। इसके लिए पूजा घर में बैठकर भगवान धन्वंतरि के मंत्र “ॐ धन्वंतराये नमः॥” का कम से कम 108 बार जाप करें। जाप के अंत में कहें कि हे भगवान धन्वंतरि यह जाप आपके चरणों में समर्पित करता हूं, कृपया हमें उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें। इसके बाद गणेश लक्ष्मी पूजन जरूर करें।
कृपया पूरा पढ़े "धनतेरस पावन कथा" :- dhanteras katha


Dhanteras puja vidhi in hindi

Lakshmi Puja Vidhi | दीपावली पूजन विधि :- diwali laxmi puja vidhi

धनतेरस 2018 जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि, यम का दिया कैसे जलाएं

How to do Dhanteras Puja

लक्ष्मी माता धन की देवी है, अगर इनकी उपासना दिवाली पर सच्चे दिल से कर ले तो माता रानी को मनाया जा सकता है। दिवाली की पूजन 5 दिन होती है, धनतेरस से लेकर के भैया दूज तक यानी 5 दिन पूजा का नियम होता है। सबसे पहले जानते हैं धनतेरस की पूजा कैसे करनी है और कितने बजे करनी है। दोस्तों इस बार दिवाली 7 नवंबर को है और धनतेरस उसके 2 दिन पहले आता है। वह है 5 नवंबर, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी होती है (13th date) उसदिन हम लोग धनतेरस मनाते हैं। 5 नवंबर सोमवार के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा

Auspicious Time for Dhanteras Puja
1) प्रदोष काल:- 
सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है। प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है।

दिल्ली में 5 नवम्बर सूर्यास्त समय सायं 17:30 तक रहेगा। इस समय अवधि में स्थिर लग्न 18:10 से लेकर 20:09 तक वृषभ लग्न रहेगा। मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।


2) चौघाडिया मुहूर्त:-

5 नवम्बर 2018, अमृ्त काल मुहूर्त 16:30 से 18:00 तक चर 18:56 से लेकर 19:30 तक

How to do dhanteras puja at home in hindi उपरोक्त में लाभ समय में पूजन करना लाभों में वृ्द्धि करता है। शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन, स्वास्थय व आयु में शुभता आती है। सबसे अधिक शुभ अमृ्त काल में पूजा करने का होता है। इस शुभ समय में पूजा करने से धन, स्वास्थ्य और आयु बढ़ती है। इस से यम प्रसन्न होते हैं और जीव की अकाल मृत्यु नहीं होती है। घर के बाहर दिया जला कर रखा जाता है। और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन घर में नए बर्तन, गाड़ी, सोना आदि खरीदना शुभ माना जाता है। तो आप यह जान ले की किस प्रकार आपको यह पूजन करना है। कहीं पर भी एक साफ-सुथरी जगह आप अपने घर में निश्चित करले। वहां पर थोड़ा सा गंगाजल डालकर शुद्ध कर ले। उसके बाद उस पर कच्ची मिट्टी या गोबर लेकर के वह लगा दे और फिर वहां पर आप स्वास्तिक या गोली बना ले। अगर आप यह नहीं करना चाहते हैं तो आप किसी पाटे पर भी यह उपाय कर सकते हैं। पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर आपको चार सुपारी लेनी है, थोड़ी सी मोली,थोड़ी से रोली, चावल, मिठाई याशक्कर और कच्ची मिट्टी का दिया। इसके साथ-साथ तुलसी अपने पास जरूर रखें क्योंकि यह आयुर्वेद के देवता धन्वंतरी का दिन है और इसलिए धन्वंतरी देवता की पूजा में तुलसी, डूब आदि जड़ी बूटियां चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है। मिट्टी का सुपड़ा और गणेश जी की फोटो वहां रख सकते हैं। सबसे पहले गणेश जी को आप को पाटि पर स्थापित करना है।
|| ओम गण गणपतये नमः || ओम गणेशाय नमः
ऐसा मन में भाव करते हुए गणेश जी का आवाहन करना है। ध्यान रखें पूरी पूछा आपको उत्तर मुखि या पूरब मुखी हो करके करनी है। जो दिया आप जो जलाएंगे उसका मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए और ध्यान रखें पूजा से पहले अपने शरीर की शुद्धि कर ले, स्वच्छ कपड़े पहने और परिवार सहित आपको यह पूजन करनी चाहिए। गणेश जी की स्थापना करने के बाद, गणेश जी की पंचोपचार पूजन करें धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजा करें। इसके बाद आपको भगवान धन्वंतरि की पूजा करनी है, भगवान धनवंतरी की चित्र या मूर्ति आपके पास है तो ठीक है नहीं तो जो सुपारी आपने लिया है, उसमें से एक सुपारी पर मौली लपेट के कुबेर जी का भाव करके अथवा हाथ में फूल लेते हुए उनका आवाहन करेंगे।
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Dhanvantari Puja Vidhi in Hindi

धनतेरस 2018 | धन तेरस पूजन तथा धन प्राप्ति मंत्र | Dhanteras Pooja
स्कंदपुराण के अनुसार धनतेरस की पूजा शुभ मुहूर्त में सही विधि से करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म में धनतेरस के त्यौहार को सुख, समृद्धि यश तथा वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन चिकित्सा के धन्वन्तरि देवता की पूजा की जाती है तथा अच्छे स्वास्थ्य की भी कामना की जाती है। धन्वंतरि की पूजा करने से माता लक्ष्मी जी भी अति प्रसन्न होती है। धनतेरस के पर्व पर देवी लक्ष्मी जी तथा धन के देवता कुबेर के पूजन की परंपरा है तथा देवता यम को दीप दान करके पूजा करने का भी विधान है। आज हम आपको धनतेरस के पूजन की सही विधि तथा धन प्राप्ति मंत्र बताएंगे। धनतेरस पूजा विधि घर के पूर्व दिशा या घर के मंदिर के पास साफ-सुथरी जगह पर गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी के पीढ़ा पर रोली के माध्यम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। उसके पश्चात एक मिट्टी के दीए को उस पीढ़ा पर रखकर प्रज्वलित करें। दिए के आसपास तीन बारी गंगाजल का छिड़काव करें, दिए पर रोली का तिलक लगाएं। उसके पश्चात तिलक पर कुछ चावल रखें इसके पश्चात ₹1 का सिक्का दिए में डाल दे। दिए पर थोड़े पुष्प अर्पित करके, दिए को प्रणाम करें और परिवार के सभी सदस्यों को तिलक लगाएं। अब उस दिए को अपने घर के प्रवेश द्वार के समीप रखें उसे दाहिने ओर रखें तथा यह ध्यान दें कि दिए की लोह दक्षिण दिशा की तरफ हो। इसके पश्चात यम देव की पूजा हेतु मिट्टी का दिया जलाएं तथा धन्वंतरि पूजा घर में करें। अपने आसन पर बैठकर धनवंतरी मंत्र “ॐ धन धन्वंतरये नमः॥” 108 बार या यथासंभव जाप करें, तथा ध्यान लगाकर यह आह्वान करें कि हे धन्वंतरी देवता मैं यह मंत्र का उच्चारण आपके चरणों में अर्पित करता हूं। 
धनवंतरी पूजा के पश्चात भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करनी अनिवार्य है। भगवान श्री गणेश तथा माता लक्ष्मी हेतु मिट्टी के दीए प्रज्वलित करें, तथा धूप जलाकर उनकी पूजा करें। भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढ़ाइए तथा मिठाइयों का भोग लगाएं। इसके पश्चात शुभ मुहूर्त में घर की तिजोरी में 13 दीपक जलाकर कुबेर जी का पूजन करना चाहिए। देव कुबेर का ध्यान करते हुए भगवान कुबेर को फूल चढ़ाएं तथा उनका ध्यान लगाकर यह आह्वान करें कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले गुरु दामिनी के समान आभावाले, दोनों हाथों में गधा व वार धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृत शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का मैं ध्यान करता हूं। इसके पश्चात धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करके यह मंत्र का उच्चारण करें, कुबेर मंत्र:- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये. धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ इसके पश्चात 7 धान्य- गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जो, चावल तथा मसूर के साथ भगवती का पूजन करना लाभकारी माना गया है। पूजन सामग्री में विशेष रूप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प का प्रयोग करना उचित है। इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिए भोग के रूप में श्वेत मिष्ठान का प्रयोग करें जिससे आप को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। हमारा आपसे निवेदन है कि यह जानकारी आप WhatsApp या Facebook जैसे सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें।
Dhanteras (Diwali) पे Gold क्यों खरीदते हैं

Why to Buy Gold On Dhanteras

धनतेरस 2 संस्कृत शब्द से बना है जिसका पहले हिस्से का मतलब धन है और तेरस का अर्थ हिंदू कैलेंडर के अनुसार 13th दिन से है। धनतेरस को दिवाली यानी की रोशनी के त्योहार से 2 दिन पहले मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन देश में आभूषण, सिक्के और सोना खरीदने का सबसे बड़ा अवसर होता है।  तो चलिए जानते हैं थोड़ा गहराई से की धनतेरस पर सोना खरीदने का अनुष्ठान वास्तव में अस्तित्व में कैसे आया था।
कहते हैं कि राजा हेम के बेटे पर श्राप की एक रोचक कहानी धनतेरस से जुड़ी है। राजा हेम के 16 वर्षीय बेटे पर श्राप ऐसा था कि उसके शादी के चौथे दिन ही उसकी मृत्यु हो जानी थी। इस श्राप के बारे में पता चलने के बाद राजकुमार की पत्नी ने अपने पति को बचाने के लिए एक योजना बनाई। उसने अपने पति से अनुरोध किया कि वह अपनी शादी के चौथे दिन सोए नहीं। उसने सारा सोना, गहने और सिक्के इकट्ठा करके उनको पति के कमरे के दरवाजे के आगे लगा दिया। उसने घर के चारों ओर जितने दीपक वह जला सकती उसने जलाए। उसके बाद उसने रात भर बैठकर कई गीत और कहानियां सुनाए ताकि वह अपने पति को सोने से रोक सके। जल्द ही भगवान यमराज एक नाग के रूप में राजा हेम के पुत्र को लेने के लिए आए। लेकिन दीपक और सोने के गहने अथवा सिक्कों की उज्जवल चमक ने उनको अंधा कर दिया और वह कक्ष में प्रवेश नहीं कर सके, इसके बजाय वह गहने की ढेर के ऊपर बैठ गए और उन्होंने सभी अलग-अलग मधुर गीत सुने जो बेटे की पत्नी गा रही थी। जब सुबह हुई तो यमराज ने राजकुमार को बिना कोई नुकसान पहुंचाए छोड़ दिया। तब से धनतेरस को यमदीपदान भी कहा जाता है।
जानें धनतेरस और दिवाली पर रंगोली बनाने का महत्व और फायदे:- why we make rangoli on diwali
मृत्यु के भगवान यमराज की स्मृति में लोग अपने घरों में रात भर दीपक जलाते हैं। इसके अलावा देखा जाए तो धनतेरस सभी के लिए एक त्यौहार है लेकिन सोने में निवेश करने वाले व्यापारी समुदाय के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। धनतेरस आमतौर पर लक्ष्मी पूजा के 1 दिन पहले आता है और कहां जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी सभी भक्तों पर अपने आशीर्वादों की बौछार करती है। नई चीजें या सोना खरीदना धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत करने का एक तरीका माना जाता है। इसके अलावा भगवान कुबेर धन के भगवान की भी इसी दिन पूजा की जाती है। वास्तव में धनतेरस पर भक्त कुबेर लक्ष्मी पूजा करते हैं, ऐसा माना जाता है कि सोना खरीदना अच्छे भाग्य का प्रतीक है। यही वजह है कि लोग सोने के गहने या सोने के सिक्के खरीदते हैं जिन पर देवी लक्ष्मी या भगवान गणेश की तस्वीर होती है।

Dhanteras gold buying muhurat

धनतेरस के दिन खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त शाम 7:19pm से 8:17pm तक रहेगा। हालांकि पूरा दिन खरीदारी के लिए शुभ है, लेकिन धनतेरस के दिन कोई खास चीज विशेष मुहूर्त में खरीदी जाए तो शुभ होता है। इसी मुहूर्त में पूजा करना भी लाभदायक होता है।
Auspicious time to buy gold on dhanteras, So this was all about why we buy gold on dhanteras and dhanteras gold buying muhurat. We hope you enjoyed reading our article, so kindly share dhanteras puja vidhi with your loved one who are doing dhanteras puja 2018 this year at their home.
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