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Durga Chandi Path in Hindi - दुर्गा चंडी पाठ 2017

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जो भी व्यक्ति पूजा करने वाले हैं, कृपया वह स्नान करके तैयार हो जाए और शुद्धीकरण की क्रिया संपन्न करके आसन पर विराजमान हो जाए।  इसके साथ-साथ शुद्ध जल, पूजा करने की सामग्री और श्री दुर्गा सप्तशती की पुस्तक सामने रखने। पूजनकरता अपने माथे पर पसंद अनुसार भस्म, चंदन अथवा रोली लगा लें, शिखा बांध लें, फिर पूर्वाभिमुख होकर तत्व शुद्धि के लिए चार बार आचमन करें। इस समय निम्न मंत्रों को बोलें-

 Sri Durga Saptashati | Chandi Path | Devi Mahatmyam

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नीचे दिए गए वीडियो को पूरा अवश्य देखें:-

दुर्गा सप्तशती चंडी पाठ- हिंदी में Durga Saptashati Chandi Path



दुर्गा सप्तशती के पाठ में विधि का विधान ध्यान रखना बहुत ही उत्तम है, इसमें सबसे उत्तम बात यह है की भगवती माता दुर्गा के चरणों में प्रेमपूर्वक भक्ति, श्रद्धा और भक्ति के साथ जगदंबा के स्मरण पूर्वक सप्तशती का पाठ करने वालों को उनकी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। आज हम शुरू करेंगे पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ, कई जगह आपको यह पाठ अलग-अलग खंड में मिलेंगे पर जहां पर हम इसे एक ही साथ सारा पाठ आपके लिए लाए हैं ताकि आपको सुविधा हो। ऊपर दिए गए वीडियो में आपने जरूर हमारा सब सती का पाठ सुना होगा और उम्मीद है कि आपको वह अच्छा भी लगा होगा। हमें उम्मीद है कि आपका पूजा बहुत ही अच्छी तरह से संपन्न हुआ होगा और हम सब पर मां की कृपा बनी रहे।


ॐ ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा॥
ॐ क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा॥

इसके पश्चात प्राणायाम करके गणेश आदि देवताओं एवं गुरुजनों को प्रणाम करना ना भूले। और फिर 'पवित्रेस्थो वैष्णव्यौ' इत्यादि मन्त्र से कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल फूल, अक्षत और जल लेकर निम्नांकित रूप से संकल्प करें-

Durga chandi path in hindi

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। ॐ नमः परमात्मने, श्रीपुराणपुरुषोत्तमस्य श्रीविष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम्‌ उत्तमे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरान्वितायाम्‌ अमुकनक्षत्रे अमुकराशिस्थिते सूर्ये अमुकामुकराशिस्थितेषु चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुक नाम अहं ममात्मनः सपुत्रस्त्रीबान्धवस्य श्रीनवदुर्गानुग्रहतो ग्रहकृतराजकृतसर्व-विधपीडानिवृत्तिपूर्वकं नैरुज्यदीर्घायुः पुष्टिधनधान्यसमृद्ध्‌यर्थं श्री नवदुर्गाप्रसादेन सर्वापन्निवृत्तिसर्वाभीष्टफलावाप्तिधर्मार्थ-
काममोक्षचतुर्विधपुरुषार्थसिद्धिद्वारा श्रीमहाकाली-महालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताप्रीत्यर्थं शापोद्धारपुरस्परं कवचार्गलाकीलकपाठ- वेदतन्त्रोक्त रात्रिसूक्त पाठ देव्यथर्वशीर्ष पाठन्यास विधि सहित नवार्णजप सप्तशतीन्यास-धन्यानसहितचरित्रसम्बन्धिविनियोगन्यासध्यानपूर्वकं च 'मार्कण्डेय उवाच॥ सावर्णिः सूर्यतनयो यो मनुः कथ्यतेऽष्टमः।' इत्याद्यारभ्य 'सावर्णिर्भविता मनुः' इत्यन्तं दुर्गासप्तशतीपाठं तदन्ते न्यासविधिसहितनवार्णमन्त्रजपं वेदतन्त्रोक्तदेवीसूक्तपाठं रहस्यत्रयपठनं शापोद्धारादिकं च किरष्ये/करिष्यामि।

कृपया जिस तरह से ऊपर दी गई कथा और मंत्र का लेख किया गया है, उसी तरह आप उच्चारण करें और यह संकल्प करके देवी का ध्यान करते हुए पंचोपचार की विधि पढ़ते हुए पुस्तक की पूजा करें।

'ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशागुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा'
यह ऊपर दिया हुआ मंत्र शापोद्धार मंत्र है, और इस मंत्र का शुरुआत और अंत में कृपया 7 बार जाप करें। उसके साथ-साथ अनन्तर उत्कीलन मन्त्र का भी जाप किया जाता है। हम कामना करते हैं कि आपकी पूजा मंगलमय हो और आपके सारे दुख तकलीफ दूर हो जाए|
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